अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर धाम के पास काफलिखान गाँव के रवि तमता ने अगस्त 2026 में एक सिंगल-सीट इलेक्ट्रिक वाहन HAPIDA SKYNeX का परीक्षण दिखाया। इंडियन एक्सप्रेस और सीएनबीसी टीवी18 के अनुसार यह प्रोटोटाइप उनकी स्टार्टअप हैपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड के जरिए बना है। एएनआई ने लिखा कि यह संशोधित ड्रोन तकनीक पर आधारित ऑल-इलेक्ट्रिक क्राफ्ट है।

वायरल शॉर्ट का सवाल था: क्या इसे ‘चीन कॉपी’ कहना सही है? उस आरोप का स्रोत कोई सरकारी जाँच या पेटेंट मुकदमा नहीं, सोशल मीडिया टिप्पणी है। सीएनबीसी टीवी18 के अनुसार तमता ने कहा कि वाहन चीन से आयात नहीं किया गया और उन्होंने पत्रकारों को मैन्युफैक्चरिंग यूनिट देखने का न्योता दिया। समान दिखने वाली तकनीक अपने आप में चोरी का सबूत नहीं होती; प्रमाण दस्तावेज, आपूर्ति श्रृंखला और डिज़ाइन रिकॉर्ड से आता है, जो सार्वजनिक रूप से पेश नहीं किए गए।

प्रोटोटाइप क्या है, कार नहीं

HAPIDA SKYNeX व्यावसायिक ‘फ्लाइंग कार’ नहीं है। यह परीक्षण चरण में है। पारंपरिक विमान ईंधन पर चलते हैं; कंपनी इसे बिजली पर बताती है, यानी टेलपाइप उत्सर्जन शून्य होने का दावा। पहाड़ों में 40 किलोमीटर की सड़क यात्रा करीब 90 मिनट की बताई गई; तमता का कहना है कि उड़ान से 10-15 मिनट लग सकते हैं। यह आकांक्षा है, प्रमाणित परिचालन क्षमता नहीं।

तमता ने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि प्रदर्शन के बाद मीडिया से बात नहीं कर पाए, अब अल्मोड़ा प्रशासन प्रदर्शन और मीडिया संभाल रहा है। सीएनबीसी ने लिखा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी वीडियो एक्स पर शेयर किया। प्रशासनिक सहयोग का मतलब उड़ान प्रमाणपत्र नहीं है। भारत में मानव-युक्त ड्रोन/ईवीटीओएल के लिए डीजीसीए और संबंधित नियमों की मंजूरी चाहिए।

क्या तय है

तय है कि अल्मोड़ा के एक नवप्रवर्तक ने खुले मैदान में एक सीट वाले इलेक्ट्रिक क्राफ्ट का परीक्षण सार्वजनिक किया, और एएनआई समेत कई संगठनों ने वह फुटेज चलाया। तय नहीं है कि यह नियामक मंजूरी, वाणिज्यिक उत्पादन या किसी चीनी उत्पाद की नकल है। ‘मेड इन इंडिया फ्लाइंग कार’ कहना फिलहाल अतिरंजित होगा; सही वाक्य है: पहाड़ी जिले में बना इलेक्ट्रिक प्रोटोटाइप, परीक्षण के चरण में।