छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के कारोबारी उमेश कुमार सिन्हा से ₹1.13 करोड़ की ठगी के मामले की जांच करते हुए रायपुर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों को पैसा दोगुना करने और केमिकल के जरिए काले नोटों को असली करेंसी में बदलने का झांसा देते थे।
इस मामले में पुलिस ने पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट से मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इससे पहले नागपुर से दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए देशभर में 100 से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है।
₹1.13 करोड़ की ठगी से सामने आया मामला
मामला बालोद निवासी और सालिक ग्रुप के डायरेक्टर उमेश कुमार सिन्हा की शिकायत से सामने आया।
पुलिस के मुताबिक, कारोबारी को बड़े निवेश और फंड से जुड़ी बातों के जरिए आरोपियों ने अपने संपर्क में लिया। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों और बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया और धीरे-धीरे कारोबारी का भरोसा जीत लिया।
इसके बाद अलग-अलग कारण बताकर उनसे पैसे लिए जाने लगे। कभी निवेश से जुड़ी प्रक्रिया, कभी केमिकल और कभी दूसरी औपचारिकताओं के नाम पर रकम मांगी गई।
इस तरह कारोबारी से कुल ₹1.13 करोड़ की रकम ले ली गई। जब लंबे समय तक कोई फायदा या पैसा वापस नहीं मिला, तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
केमिकल से काले नोट असली बनाने का दावा
पुलिस की जांच में गिरोह के ठगी करने के एक खास तरीके का पता चला।
आरोपी कथित तौर पर लोगों को बताते थे कि उनके पास ऐसी खास केमिकल प्रक्रिया है, जिससे काले नोटों को वापस असली नोटों में बदला जा सकता है।
इसके साथ ही वे पैसा दोगुना करने का भी लालच देते थे।
सिर्फ बातों से भरोसा नहीं बनाया जाता था। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास काले कागज, कांच की प्लेट और केमिकल जैसी चीजें थीं, जिनकी मदद से सामने वाले को एक डेमो दिखाया जाता था।
यही डेमो पीड़ित का भरोसा जीतने का सबसे बड़ा जरिया बनता था।
पहले छोटा डेमो, फिर बड़ी रकम
इस तरह के फ्रॉड में पहले सामने वाले को एक छोटी रकम या सीमित मात्रा में प्रक्रिया दिखाकर भरोसा दिलाने की कोशिश की जाती थी।
जब व्यक्ति को लगने लगता था कि केमिकल सच में काम कर रहा है, तब उससे बड़ी रकम लगाने के लिए कहा जाता था।
इसके बाद अलग-अलग बहानों से लाखों और करोड़ों रुपये लिए जाते थे।
यानी असली खेल केमिकल का नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे और लालच का था।
D Company से कनेक्शन का भी दावा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए खुद को बड़े लोगों और बड़े गैंग से जुड़ा बताते थे।
रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि आरोपी D Company से जुड़े होने का दावा करते थे।
इस तरह की बातें सामने वाले व्यक्ति पर दबाव बनाने और उसे यह विश्वास दिलाने के लिए की जाती थीं कि आरोपियों के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि किसी आरोपी का खुद को D Company या किसी अंडरवर्ल्ड नेटवर्क से जुड़ा बताना यह साबित नहीं करता कि उसका वास्तव में उस संगठन से संबंध था। यह पुलिस जांच में सामने आया आरोप/दावा है।
बड़े होटल और रिसॉर्ट में होती थी मीटिंग
पुलिस के मुताबिक, गिरोह आम जगहों पर मिलने के बजाय बड़े होटल और रिसॉर्ट जैसी जगहों का इस्तेमाल करता था।
इससे सामने वाले को यह महसूस कराया जाता था कि वह किसी बड़े और प्रभावशाली नेटवर्क के लोगों से मिल रहा है।
आरोपी कथित तौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जिनके पास बड़ी रकम हो और जो निवेश या जल्दी पैसा बढ़ाने में दिलचस्पी रखते हों।
नागपुर से मिला गिरोह का सुराग
उमेश कुमार सिन्हा की शिकायत के बाद रायपुर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने मोबाइल नंबर, बातचीत, डिजिटल जानकारी और दूसरे सुरागों की जांच की। इसी दौरान जांच नागपुर तक पहुंची।
पुलिस ने सबसे पहले नागपुर से दो महिला आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इनसे पूछताछ और मोबाइल फोन की जांच के बाद पुलिस को गिरोह के दूसरे सदस्यों और उनके ठिकानों के बारे में जानकारी मिली।
पुणे के खंडाला रिसॉर्ट में पुलिस की कार्रवाई
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के पुणे में होने की जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस टीम ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखी और पुणे के खंडाला स्थित एक रिसॉर्ट में कार्रवाई की।
पुलिस के मुताबिक, यहीं से मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने गिरोह के पास मौजूद बड़ी मात्रा में नकदी और दूसरे सामान को भी जब्त किया।
4 करोड़ से ज्यादा कैश और 17 मोबाइल बरामद
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से:
- 4 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद
- 17 मोबाइल फोन
- नोट के आकार के काले कागज
- कांच की प्लेटें
- केमिकल से जुड़ी सामग्री
- कई दस्तावेज
बरामद किए गए।
पुलिस अब इन सामानों और पैसों के स्रोत की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने इससे पहले कितने लोगों को अपना शिकार बनाया।
2005 से सक्रिय होने का दावा
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह कथित तौर पर साल 2005 से सक्रिय था।
जांच में देश के अलग-अलग हिस्सों में इसी तरह की ठगी के मामलों से इसके तार जुड़ने की बात सामने आई है।
पुलिस का दावा है कि 100 से ज्यादा लोग इस नेटवर्क के शिकार हो चुके हैं।
हालांकि, पुराने सभी मामलों और कुल ठगी की रकम की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
लोगों को कैसे फंसाते थे?
पूरे मामले को अगर आसान भाषा में समझें तो गिरोह का तरीका कुछ ऐसा था:
पहला कदम: बड़े लोगों और बड़े नेटवर्क से कनेक्शन होने का दावा।
दूसरा कदम: बड़े होटल या रिसॉर्ट में मीटिंग करके अपना रुतबा दिखाना।
तीसरा कदम: काले नोट को केमिकल से असली बनाने या पैसा डबल करने का दावा।
चौथा कदम: सामने वाले को केमिकल का डेमो दिखाकर भरोसा जीतना।
पांचवां कदम: भरोसा बनने के बाद बड़ी रकम की मांग करना।
छठा कदम: पैसे लेने के बाद अलग-अलग बहानों से रकम ऐंठना।
यानी पूरा खेल लालच और भरोसे पर बनाया गया था।
इस मामले से क्या सीख मिलती है?
किसी भी व्यक्ति को अगर कोई यह कहे कि वह आपका पैसा जल्दी दोगुना कर सकता है, तो सावधान हो जाना चाहिए।
खासकर अगर इसके लिए केमिकल, काले नोट, गुप्त प्रक्रिया या किसी बड़े नेटवर्क का नाम लिया जा रहा हो, तो इसे बड़ा रेड फ्लैग मानना चाहिए।
बड़े होटल में मीटिंग होना, महंगी गाड़ियां होना, सिक्योरिटी गार्ड के साथ घूमना या बड़े लोगों के साथ तस्वीर दिखाना किसी दावे को सही साबित नहीं करता।
रायपुर के तेलीबांधा थाने में दर्ज ₹1.13 करोड़ की ठगी की जांच ने पुलिस को एक कथित अंतरराज्यीय ठगी नेटवर्क तक पहुंचाया।
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह लोगों को केमिकल से काले नोट असली बनाने और पैसा दोगुना करने का झांसा देकर अपना शिकार बनाता था। नागपुर से दो महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पुणे के खंडाला पहुंची, जहां एक रिसॉर्ट से मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
मामले में 4 करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी, 17 मोबाइल और कथित ठगी में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें बरामद होने की बात पुलिस ने कही है। फिलहाल पुलिस गिरोह के पुराने मामलों और इसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जांच कर रही है।
याद रखिए—जो पैसा कुछ ही समय में डबल करने का दावा करे, वहां मुनाफे से पहले ठगी का खतरा जरूर जांच लें।
