शॉर्ट पाकिस्तान के एक परिवार को 130 वर्षों से बंधुआ मजदूरी में और एक विदेशी को मुक्तिदाता बताता है। भास्कर की 17 मई 2026 सुर्खी उसी फ्रेम से मेल खाती है।

बंधुआ मजदूरी पाकिस्तान और भारत दोनों में कानूनन अपराध और फिर भी मौजूद है। एक परिवार की कहानी को पूरे देश का प्रमाण न बनाएँ। 130 साल पीढ़ियों का अनुमान हो सकता है, जनगणना नहीं। दूसरा अंतरराष्ट्रीय स्रोत न मिलने तक आंकड़ा भास्कर/चैनल का दावा रहे।