रांची में 7 अगस्त 2026 को सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं को लेकर निकले छात्र मार्च के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकी गई। टाइम्स ऑफ इंडिया और न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने घटना की पुष्टि की। मार्च JPSC संयुक्त सिविल सेवा और JSSC CGL सहित परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में विधानसभा की ओर जा रहा था।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार AISA झारखंड सचिव त्रिलोकी कुमार ने कहा कि हमलावर जुलूस के साथ छात्र बनकर चल रहा था और महावीर मंदिर के पास, विधानसभा से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले, स्याही फेंकी। उस समय 1,000 से 1,500 लोग थे—AISA, SFI, AISF, झारखंड जनाधिकार महासभा और कुछ आदिवासी संगठन, सचिव ने कहा।

पुलिस कार्रवाई: दो रिपोर्ट, दो विवरण

टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा कि स्याही फेंकने वाले व्यक्ति को पुलिस हिरासत में लिया गया। इंडियन एक्सप्रेस ने कार्यकर्ता सिराज दत्ता का हवाला दिया: हमलावर को प्रदर्शनकारियों ने पकड़ा और पीटा, दत्ता ने पिटाई रुकवाई। दत्ता ने उस समय कहा कि व्यक्ति की पहचान साफ नहीं और आयोजक शिकायत दर्ज नहीं कराने वाले। ये विवरण मेल नहीं खाते। बाद की पुलिस एफआईआर सार्वजनिक लिंक इस शोध में नहीं मिली। इसलिए दोनों पाठ दर्ज हैं: एक अखबार हिरासत बताता है, दूसरा उस समय की मैदान स्थिति।

बोरा का आरोप, साक्ष्य की सीमा

कुछ रिपोर्टों में बोरा ने हमले का आरोप ‘आरएसएस-भाजपा गुंडों’ पर लगाया और कहा कि वे यह स्याही गर्व से पहनती हैं। इंडियन एक्सप्रेस में उनका बयान अलग है: “कुछ असामाजिक तत्व जो छात्र आंदोलन को सफल नहीं होने देना चाहते… हम ठीक से नहीं जानते कि वे कौन हैं।” राजनीतिक संगठन का नाम तब तक तथ्य नहीं जब तक जाँच या आरोपपत्र न हो। शॉर्ट ने हमले को राजनीतिक हस्तक्षेप की बहस से जोड़ा; बहस है, निष्कर्ष नहीं।

छात्र माँगें

बोरा ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा रद्द कर नई तारीख और जेएसएससी सीजीएल रद्द करने की माँग की। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार उन्होंने एएनआई से कहा कि पेपर लीक की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों पर नहीं टाली जा सकती, सरकारी अधिकारी जवाबदेह हों, आरोपी एजेंसियाँ हटाई जाएँ। वे दिल्ली के जंतर मंतर छात्र प्रदर्शन से भी जुड़ी रहीं, एक्सप्रेस ने लिखा। रांची वाला हमला उसी परीक्षा-विरोध की कड़ी में हुआ, अलग राज्य की अलग घटना है।