खगड़िया के जमालपुर इलाके में पाँच मंजिला मकान के बाहर काली टेस्ला और सफेद टाटा सफारी खड़ी थीं। दोनों पर ‘गवर्नमेंट ऑफ इंडिया’ जैसा स्टिकर था। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, शनिवार दोपहर पुलिस जब वहाँ पहुँची तो 50 वर्षीय रहने वाले ने खुद को आईएएस अधिकारी मुकेश कुमार गुप्ता बताया और फोन पर एक पहचान पत्र दिखाया जिसमें वह केंद्रीय सतर्कता आयोग का ‘चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर’ लिखा था।

आगे पूछताछ में, पटना संवाददाता के हवाले से पुलिस अधिकारी ने कहा, उन्होंने दावा किया कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के अधीन अंडरकवर एजेंट हैं। पहचान जाँच के बाद पुलिस ने उन्हें सार्वजनिक सेवक का प्रतिरूपण, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों में गिरफ्तार किया। डोभाल या एनएसए कार्यालय का कोई बयान इस रिपोर्ट में उद्धृत नहीं है; दावा अभियुक्त का है, पुष्टि पुलिस की है कि दावा झूठा निकला।

नाम को लेकर रिपोर्टों में फर्क

इंडियन एक्सप्रेस उन्हें मुकेश कुमार गुप्ता लिखता है। फर्स्टपोस्ट ने नाम मनीष कुमार गुप्ता, उर्फ चिक्कू दिया और लिखा कि अभियान गोगरी डीएसपी चंदन ठाकुर के नेतृत्व में खगड़िया एसपी भानु प्रताप सिंह के निर्देश पर चला। एक्सप्रेस के अनुसार बरामद क्रेडिट कार्ड कई नामों पर थे—मनीष कुमार, अजित कुमार, एन.के. कुमार और मुकेश कुमार गुप्ता। जब तक पुलिस का औपचारिक आरोपपत्र सार्वजनिक न हो, दोनों नामों का जिक्र जरूरी है। एक व्यक्ति को दो लोगों से मिलाना गलत होगा; एक ही गिरफ्तारी की दो रिपोर्टिंग है।

घर से क्या मिला

एक्सप्रेस के अनुसार पाँच आईफोन, मैकबुक, आईपैड, 4 टीबी हार्ड डिस्क और 11 कैमरों वाला सीसीटीवी सिस्टम मिला। बीस क्रेडिट कार्ड—कुछ अमेरिकन एक्सप्रेस—चार चेकबुक, आठ डेबिट कार्ड और दो प्रायोरिटी पास भी बरामद हुए। चार फोन के नंबर या अनलॉक कोड देने से उन्होंने इनकार किया, पुलिस ने कहा।

खोज में बारासिंघा के दो सींग भी मिले। बिहार में शराबबंदी है; पुलिस ने 32 बोतल विदेशी शराब (लगभग 31.24 लीटर) और 30 कैन बियर (9.9 लीटर) बताए। अभियुक्त ने कहा कि लंदन में फंड मैनेजर भाई अजित कुमार कभी शराब लाते हैं, लेकिन वैध दस्तावेज नहीं दिखाए। अलग मामला बिहार निषेध अधिनियम और जम्मू-कश्मीर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत दर्ज होने की बात कही गई। उन्होंने जब्ती सूची पर दस्तखत करने से मना कर दिया, पुलिस ने कहा।

₹100 करोड़ का आंकड़ा

फर्स्टपोस्ट ने लिखा कि जाँचकर्ताओं के अनुमान में संपत्ति करीब 100 करोड़ रुपये की है। इंडियन एक्सप्रेस ने यह आंकड़ा दोहराया नहीं। वहाँ कहा गया कि संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की जाँच चल रही है, आर्थिक अपराध इकाई मदद कर सकती है, और बिहार के बाहर व विदेश में संपत्ति की सूचना मिली है। वायरल शॉर्ट में ‘₹100 करोड़ की प्रॉपर्टी’ को पक्की खबर की तरह पेश किया गया। सही स्थिति: कुछ रिपोर्टों में पुलिस अनुमान है; स्वतंत्र, दस्तावेजी मूल्यांकन सार्वजनिक नहीं है।

आगे की जाँच

पुलिस का कहना है कि वह खगड़िया और अन्य जिलों में लंबे समय से आईएएस बनकर दबदबा बनाते और अफवाहें फैलाते रहे। धोखाधड़ी से संपत्ति जुटाने की आशंका जाँच का विषय है, सिद्ध दोष नहीं। अजित डोभाल से किसी संबंध का कोई प्रमाण रिपोर्टों में नहीं है; उल्टा, पुलिस ने उस दावे को झूठा पाया। मामला अदालत और आगे की तलाशी पर है।