अभिजीत दिपके से जुड़े सीजेपी धरने ने दिल्ली में महीनों सुर्खियाँ लीं। शॉर्ट वायरल वीडियो के आधार पर झड़प, पत्रकारों से बदसलूकी और विवादित नारों की चर्चा करता है, और चेतावता है कि पूरे समूह पर आरोप नहीं लगाना।

कई परतें

स्क्रॉल ने हजारों छात्रों के आने का कारण पूछा—परीक्षा, बेरोजगारी, लीक। एक्सप्रेस ग्राउंड रिपोर्ट स्वयंसेवकों पर गई। एनडीटीवी ने पुलिस के साथ मजाक वाले इन्फ्लुएंसर क्लिप को अलग से जाँचा। ये एक-दूसरे को काटते नहीं; एक स्थल पर कई व्यवहार होते हैं।

‘पूरी तरह शांतिपूर्ण’ सांख्यिकीय दावा है। पुलिस एफआईआर, घायलों की सूची और अदालती आदेश बिना उसे सत्य या असत्य नहीं ठहराया जा सकता। शॉर्ट सही दिशा में सवाल उठाता है; निष्कर्ष खुला रहना चाहिए। इसलिए समीक्षा झंडा है।